Story of Prophet HOOD | Hazrat HOOD Ki Kahani in Hindi

Story of Prophet Hood
Story of Prophet Hood



दुनिया में बहुत सारे लोग रह रहे थे बल्कि दुनिया में जानवरों की संख्या भी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी मनुष्य और जानवर पूरी दुनिया में फैल चुकी थी उनमें बहुत सारे मनुष्य यमन में बस गए थे उन लोगों को आद कहा जाता था आद लोग कई समय तक एक ऐसी पहाड़ी के बीच में रहे जो यमन और ओमान के बीच में पढ़ती है यह लोग शरीर से काफी ताकतवर भी थे और कारीगरी भी बहुत अच्छा जानते थे यही कारण था कि वह अपने ऊंचे ऊंचे मकानों के कारण जाने जाते थे देखते ही देखते आद लोग अमीर और घमंडी हो गए वह पहाड़ों के ऊपर ऊंची इमारतों का निर्माण करने लगे और उन्हें इस बात का बहुत घमंड था कि वह ऐसा कर सकते थे ! उनकी राजनीतिक ताकत अत्याचारों के हाथ मे थी और उनके खिलाफ आवाज उठाने की ताकत किसी के हाथों में नहीं थी !

समय बीतने के साथ ही शैतान ने अपनी चाल चलना शुरू कर दिया और आद की कौम को अल्लाह पाक से दूर कर दिया जिसकी वजह से आद की कौम मैं बुत परस्ती शुरू हो गई और उन्होंने पत्थर की मूर्ति बनाना शुरु कर दिया और उसको पूजने भी लगे अल्लाह के आदेश को भूलकर वह गलत कामों की और लोगों को बढ़ावा देने लगे अल्लाह पाक इनका मार्गदर्शन कर इनको शही रास्ते पर लाना चाहते थे इसलिए अल्लाह पाक में एक और पैगंबर को भेजा जो थे पैगंबर हूद एक बहुत ही जबरदस्त और सुलझे इंसान जिन्होंने यह काम बहुत ही सब्र के साथ किया !

पैगंबर हूद ने लोगों को मूर्ति से मांगना या फिर मूर्ति को पूजने से मना किया और वह कहते थे की इन मूर्तियों को पूजने से क्या फायदा जिन्हें तुमने अपने हाथों से बनाया है और जान रखो मेरे भाइयों अल्लाह ही सबका मालिक है मैंने तुम्हें जीवन दिया है और वही तुम्हें मृत्यु भी देगा उसने तुम्हें कई खूबियों से बनाया है उन पर विश्वास करो उन्हें भूलने की कोशिश मत करो क्या तुम भूल गए पैगंबर नूह के समय मूर्ति की पूजा करने वालों के साथ क्या हुआ था लेकिन आद की कौम उनकी बात मानने को तैयार नहीं थी और वो कहते थे की क्या तुम हमारे मालिक बनना चाहते हो और हमसे पैसा लूटना चाहते हो और कहते थे चले जाओ यहां से हम तुम्हारी बात नहीं मानते उनकी बात सुनकर पैगंबर हूद ने कहां मुझे जो भी देगा अल्लाह पाक देगा और मैं उसी से मांगता हूं !

पैगंबर हूद ने कहा मुझे अल्लाह के बारे में बताने के लिए भेजा गया है फिर भी लोगों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया और कहां हम जानते हैं कि तुम एक झूठे हो और हम जूतों की बात पर विश्वास नहीं करते पैगंबर हूद ने कहा मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं भाइयों पर फिर भी वह लोग नहीं माने और वह पैगंबर की बातों पर हंसने लगे क्योंकि उन्हें अपनी कला पर घमंड था और वह जानते थे कि वह दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर है यही वजह थी कि वह पैगंबर की बात नहीं मानते थे !

आद की कौम के सरदार ने पूछा यह तो बहुत अजीब बात है की अल्लाह ने किसी को स्वर्ग से भेजने के बजाय हमारे बीच में से ही एक इंसान को चुना इसके जवाब में पैगंबर ने कहा यह कोई अचंभे की बात नहीं है अल्लाह तुम्हें सही दिशा और सही मार्गदर्शन कराना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने मुझे सही मार्गदर्शन कराने के लिए भेजा है क्या तुम्हें पता है की पैगंबर नूह के समय क्या हुआ था और क्या तुम उस बाढ़ को भूल गए जिसमें सारी मूर्तियां समा गई थी वह भी बहुत ज्यादा कठोर थी ! पैगंबर हूद ने कहा अगर तुमने अपने रहन-सहन नहीं बदला तो अल्लाह पाक तुम्हें बर्बाद कर देगा तब उनमें से एक ने कहा हमें हमारा सरदार बचाएगा जबकि पैगंबर ने बताया कि उनका सरदार ही उनके विनाश का कारण बनेगा ! आद की कौम और पैगंबर हूद के बीच इस तरह की नोकझोंक कई सालों तक चलती रहे !

जैसे-जैसे समय बीतता गया आद की कौम और ज्यादा ताकतवर होती चली गई और अब उन्होंने पैगंबर हूद को पागल बुलाना शुरू कर दिया इसके जवाब में पैगंबर कहते थे ना तो मैं पागल हूं और ना ही मैं झूठ बोल रहा हूं तो फिर आद के सरदार ने कहा अगर तुम सच बोल रहे हो तो साबित करके दिखाओ कि तुम सच बोल रहे हो और अल्लाह से कहो कि वह हमें दंड दे पीर पैगंबर ने कहा मैं झूठा नहीं हूं और अल्लाह का भेजा हुआ पैगंबर हूं लेकिन लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी और वहां से चले गए फिर पैगंबर ने अलग-अलग बस्ती के लोगों को अपनी बात समझाने की कोशिश की और पैगंबर ने कहा क्या तुम्हें लगता है कि जो घर तुमने बनाए हैं वह हमेशा रहेंगे याद रखो वह अल्लाह है जिसने तुम्हें किस्मत वाला बनाया है और अगर तो अल्लाह के आदेश का पालन नहीं करोगे तो वह तुम्हारी जगह किसी और को दे देगा अल्लाह पाक सब जानते हैं और वह सब की सुनते हैं लेकिन बस्ती के बुजुर्गों ने भी उन पर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर भी उस बस्ती के लोगों ने पैगंबर को पागल और झूठा कहा लेकिन पैगंबर हार नहीं माने उन्होंने फिर उन्हें समझाने की कोशिश की !

पैगंबर हूद ने कहा मैं इस दुनिया के मालिक का पैगंबर हूं और इमानदारी से तुम्हें उनकी बात बताने आया हूं उन्होंने पैगंबर की एक बात सुनी और पैगंबर को पीठ दिखा कर चले गए और वह लोग पूरी तरह से मूर्ति पूजक बनी रहे बस आद मैं कि लोग थे जो पैगंबर हूद की बात को सुनते थे उन्हें पैगंबर पर भरोसा था वह जानते थे कि वह सही कह रहे हैं ! पैगंबर पर भरोसा करने वालों ने उनकी बात पर विश्वास किया !

पूरे क्षेत्र में सूखा पड़ गया और कई महीनों तक बरसात की एक बूंद भी नहीं पड़ी गर्मी की वजह से लोगों का जीना कठिन हो गया था अब आद की कौम को लगा कि कुछ ना कुछ गलत जरूर हो रहा है वह पैगंबर से यह पूछने के लिए आए कि यहां पर बरसात क्यों नहीं हो रही और यहां पर सूखा क्यों पड़ रहा है पैगंबर हूद ने कहा की अल्लाह तुमसे गुस्सा है और अगर तुम अल्लाह पर भरोसा करोगे तो वह तुम्हें अपनाएंगे भी और बरसात भी करेंगे और तुम पहले से भी ज्यादा मजबूत हो जाओगे उन लोगों ने हंसकर कहा तुम दीवाने हो और उन्होंने कहा हम जानते हैं बरसात जल्द होगी हम तुम्हारे मालिक की मदद नहीं चाहते सूखा बढ़ता ही चला गया पानी की एक बूंद भी धरती पर नहीं रहा पेड़ पौधे और सब कुछ लगा ऐसा कई महीने तक चलता रहा लेकिन इसके बाद भी लोगों ने मूर्ति प्रार्थना करना नहीं छोड़ा सूखा लगातार 3 सालों तक बराबर पड़ता रहा !

एक दिन जब पैगंबर हूद अल्लाह से प्रार्थना कर रहे थे तब अल्लाह पाक ने पैगंबर से कहा मेरे मानने वालों को एक जगह पर इकट्ठा करो और उनसे कहो कि वह आद बस्ती छोड़कर चले जाएं और पैगंबर अपने मानने वालों के साथ बस्ती छोड़कर कर चले गए जैसे ही पैगंबर हूद और उनके मानने वाले बस्ती छोड़ कर गए एक बड़ा काला बादल आद बस्ती के आसमान पर गया मूर्ति पूजा करने वालों को यह लगा ही नहीं की यह अल्लाह ने किया है जिसने यह काला बादल उनको सचेत करने के लिए भेजा है उन्हें लगा कि इस बादल से बरसात होगी वह लोग मूर्ति के पास गए और बादल को भेजने का धन्यवाद दिया अचानक मौसम बदल गया और गर्म हवाओं की जगह ठंडी हवाएं चलने लगी जिसने सब को हिला कर रख दिया पेड़ पौधे घर और सब कुछ ! हवाएं लगातार चलती नहीं और तेज होती चली गई ! अब आद लोगो को लगा की यह अल्लाह के द्वारा दीया गया अज़ाब है वह सब लोग छुपने के लिए इधर-उधर भागने लगे और जाकर अपने अपने घरों में घुस गए उन्हें लगा कि वह अपने घर में सुरक्षित रहेंगे लेकिन हवाएं और तेज होती चली गई और उनके घरों को तोड़ दिया फिर वह धरती के अंदर बने हुए घर में जाकर छुपने लगे पर वह भी सब टूट फूट गए तेज हवाओं ने सारे मकानों को तोड़ डाला और साथी धरती के अंदर बने हुए मकान में जो लोग छुपे थे वह भी वही दबकर मर गए ! यह हवा 8 दिन और 7 रातों तक लगातार चलती रही और इतनी ही दिनों में आद बस्ती तबाह हो गई और वहां पर कोई भी मनुष्य जिंदा नहीं रहा सिर्फ पैगंबर हूद और उनके मानने वाले ही जिंदा थे क्योंकि उन्होंने अल्लाह के आदेश का पालन किया और उन पर भरोसा किया और फिर वह अल्लाह की इबादत करते हुए दूसरे इलाके में चले गए और अल्लाह की इबादत करते हुए सुकून का जीवन बिताने लगे अल्लाह एक ही है और सबका मालिक है !

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