Story of Prophet NOOH | Hazrat NOOH Ki Kahani in Hindi

Story of Prophet NOOH
Story of Prophet Nooh


अस्सलाम वालेकुम दोस्तों मैं आपके सामने पैगंबर नूह का इतिहास बताऊंगा और जानेंगे पैगंबर नूह के बारे में तो बिना किसी देरी के चली शुरू करते हैं !

पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम के बाद कई बरस गुजर गए फिर अल्लाह पाक ने पैगंबर नूह को भेजा पैगंबर आजम के 1000 साल बाद पैगंबर नूह को भेजा अब दुनिया में सारे लोग रह रहे थे और आबादी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी बदकिस्मती से उसी वक्त शैतान ने एक चाल चली दुनिया में रहने वाले सभी लोग मूर्ति की पूजा करनी शुरू कर दी और इसी वक्त अल्लाह ने लोगों के बीच एक और पैगंबर को भेजा जूते थे पैगंबर नूह और पैगंबर ने अल्लाह की राह दिखाना शुरू कर दिया पैगंबर नूह बार-बार लोगों से कहते वही करो जो अल्लाह ने कहा है करने के लिए पर लोग उनकी एक सुनते लोगों ने उनकी तरफ ना कोई ध्यान दिया और ना तवज्जो दी लेकिन पैगंबर ने हौसला नहीं खोया और अपने काम में लगे रहे लोग मुसलसल बुत परस्ती करते रहे लेकिन पैगंबर में बहुत सब्र था और वह लोगों को समझाते रहे और बताते रहे वह बात जो अल्लाह ने बताई है !

पैगंबर नूह ने कहा क्या तुम नहीं जानते यह पूरी दुनिया अल्लाह पाक ने बनाई है वह सभी से कहते यह जो आसमान में तुम चांद, तारे और सूरज देखते हो यह सब अल्लाह ही ने बनाए हैं उसने ही नदियों , पहाड़ , जंगल और हर वह चीज जो तुम आंखों से देखते हो यह सभी चीजें उसने सिर्फ तुम्हारे लिए ही बनाए हैं फिर तुम क्यों उसकी इबादत नहीं करते तुम क्यों बुत परस्ती कर रहते हो लोग अब पैगंबर नूह से चढ़ने लगे और वह कहते थे की तुम भी एक इंसान हो हमें लगता है कि तुम झूठ बोल रहे हो और कहते थे कि यहां से चले जाओ और हमें अकेला छोड़ दो पर सभी लोग ऐसे नहीं थे कुछ लोगों को लगता था कि पैगंबर नूह सच बोल रहे हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर कमजोर और गरीब लोग थे उन्होंने पैगंबर नूह की बातों पर गौर किया और उन्हें समझ में यह आया कि वह मूर्ति पूजा करके गुनाह कर रहे हैं !

पूरी दुनिया में दो तरह के लोग थे वह लोग जो अल्लाह की पूजा करते हैं और दूसरे वह लोग जो मूर्ति की पूजा करते हैं पैगंबर नूह ने अल्लाह की बात बताना जारी रखा बुत परस्त यह बात रोज-रोज सुनकर थक गए थे तो उन्होंने एक दिन पैगंबर नूह से कहा की अगर तुमने अब झूठ बोलना नहीं छोड़ा तो हम तुम्हें पत्थर से मारेंगे और वह चलाएं पर पैगंबर ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया और अल्लाह की बात बताना जारी रखा यह सब भूत पर्वतों से देखा नहीं जाता था इसी वजह से उन्होंने पैगंबर नूह को पत्थर मारना शुरू कर दिया और उन्हें डंडो से भी पीटा गया और बुत परस्त कहते थे कि तुम हमसे अलग नहीं हो तो हम तुम्हारी बात क्यों सुने !

कई बरस बीत जाने के बाद पैगंबर नूह मायूस हो चले सैकड़ों साल समझाने के बाद भी मुट्ठी भर लोग ही ईमान लाए थे जिन्हें उन पर यकीन था जबकि बुत परस्तों की तादाद बढ़ती ही जा रही थी एक रात जब पैगंबर नूह इबादत कर रहे थे तब अल्लाह पाक ने कहा मायूस मत हो नूह तुमने वही किया जो तुम्हें कहां गया था मैं गलत कामों के लिए दुनिया के सारे लोगों को सजा देने वाला हूं दुनिया के सारे लोग मारे जाएंगे शिवाय मुसलमान और जानवर !

पैगंबर नूह  के लिए अल्लाह का आदेश आया कि बहुत सारे पेड़ लगाओ पैगंबर नूह को इसके पीछे कोई वजह समझ में नहीं आई लेकिन उन्होंने अल्लाह पाक का हुकुम माना और बहुत सारे दरख़्त लगाएं जैसा क्यों नहीं कहा गया था उन्होंने अच्छे मुसलमानों से गुजारिश की और उन्होंने उनकी मदद भी की कई बरस के बाद अल्लाह फिर पैगंबर से बोले क्या बार अल्लाह पाक ने पैगंबर नूह को जहाज बनाने का आदेश दिया !

एक बहुत बड़ा जहाज इतना बड़ा कि जिसमें दुनिया के सारे जानवरों के जोड़े आप आए जबकि पैगंबर नूह जहाज बनाना नहीं जानते थे क्योंकि इससे पहले आज तक कोई जहाज नहीं बनाई गई थी फिर अल्लाह पाक ने उन्हें जहाज बनाने की तरकीब बताइए पैगंबर नूह ने लोगों की मदद से जहाज की तामीर करना शुरू कर दिया किसी को भी जहाज की लंबाई और चौड़ाई का अंदाजा नहीं था कुछ लोगों का मानना है कि यह 600 फीट थी जबकि कुछ का कहना है कि इसकी लंबाई 2400 फीट थी जो भी हो जहाज बहुत बड़ा था पैगंबर नूह के बच्चों ने भी इस जहाज को बनाने में मदद की पैगंबर ने जहाज बनाने के लिए शहर से दूर एक पहाड़ को चुना फिर उन्होंने जहाज बनाना शुरू किया उन्हें जहाज बनाने के लिए लकड़ी की जरूरत थी वह पेड़ जो पैगंबर नूह ने 100 साल पहले लगाए थे उन्होंने लकड़ी के लिए ऊनी पेड़ों को काटा फिर उन्होंने जहाज बनाना शुरू किया !


लोगों नेजहाज बनाने के लिए रात मेहनत करी जब बुत परस्तों ने पैगंबर नूह को जहाज बनाते हुए देखा तो उन्होंने उनका मजाक उड़ाया उन्होंने कहा तुम एक बेवकूफ बूढ़े हो तुम पहाड़ की चोटी पर जहाज बना रहे हो लेकिन पैगंबर नूह खामोश रहे और अपना काम करते रहे लोगों को पता नहीं था कि वह इतना बड़ा जहाज क्यों बना रहे हैं इसलिए उन्हें लगा कि वह दीवाने हो गए हैं कई महीनों की मेहनत के बाद , जहाज तैयार हो गया एक रात अल्लाह पाक ने पैगंबर से कहा वह जल्दी दुनिया में बाढ़ लाएंगे पैगंबर नूह ने कहा मुझे कैसे पता चलेगा क्या आप मुझे कोई इशारा देंगे बात नहीं कहा जिस दिन तुम्हारे घर के चूल्हे से पानी निकलने लगेगा उसी दिन से वह दुनिया में बाढ़ भेजेंगे अगले दिन पैगंबर नूह हर जानवरों के दो दो जोड़े देखकर हैरान हो गए जहाज हर किसम के पक्षी और जानवर से भर गया !

एक दिन पैगंबर नूह जब अपने घर में थे तभी अचानक चूल्हे में से पानी निकलने लगा पैगंबर नूह ने कहा कि वह जानते थे कि बाढ़ का वक्त गया है बाहर बारिश भी शुरू हो गई थी तभी पैगंबर नूह अच्छे मुसलमान को बुलाने निकल गए जिन्होंने जहाज बनाने में उनकी मदद करी थी उन्होंने उनसे जल्द से जल्द जहाज पर चढ़ने को कहा बुध परस्तों को यह समझ में नहीं रहा था कि यह हो क्या रहा है तो उन्होंने पैगंबर नूह का मजाक बनाना शुरू कर दिया और कहां देखो इस बेवकूफ बूढ़े को यह तो बस आम बारिश है यह कितना डरा हुआ है पैगंबर नूह ने उनकी और कोई ध्यान नहीं दिया और पैगंबर नूह ने भी बच्चों से जल्द से जल्द जहाज में चढ़ने को कहा सभी ने उनकी बात मानी शिवाय उनकी एकबीवी और बेटे के क्योंकि उन्हें पैगंबर पर यकीन नहीं था और ना ही उन्होंने जहाज बनाने में मदद की थी पैगंबर नूह ने उनसे गुजारिश की उनकी बात ना माने और अपनी बात पर अड़े रहे !

पानी अब ऊपर चुका था इसलिए पैगंबर नूह जहाज की तरफ दौड़े देखते ही देखते खतरनाक बाढ़ गई और पानी बहुत तेजी से ऊपर चढ़ गया रुको अब एहसास हो गया कि पैगंबर नूह सही कह रहे थे खुद को बचाने के लिए वह की तरफ भागे पैगंबर ने अपनी बीवी और बेटे को पहाड़ पर चढ़ते हुए देखा और चिल्लाकर कहा जल्दी आओ जहाज पर चढ़ जाओ और खुद को बचा लो लेकिन उन्होंने उनकी बात को सोना नहीं और पहाड़ के सबसे ऊपर जा पहुंचे उन्हें लगा कि ऐसा करके वह खुद को बचा सकते हैं फिर अचानक पहाड़ से भी ऊंची लहर उन से टकराई और उन्हें अपने साथ ले गई यह खतरनाक लहरें अल्लाह को ना मानने वालों को भी साथ ले गई और पानी बढ़ता ही चला गया और कुछ वक्त बाद पूरी जमीन पर पानी ही पानी था तब पैगंबर नूह ने कहा बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम जब पैगंबर के जबान से यह अल्फाज निकले तो जहाज चल पड़ा बारिश अब रुक चुकी थी लेकिन पूरी जमीन पर पानी ही पानी था जानते थे की बहुत लंबे वक्त तक जहाज में ही रहना होगा जहाज में कुल 80 लोग सवार थे और पैगंबर ने इंसान और जानवरों के लिए जहाज में ही खाने का इंतजाम कर रखा था!

यह बहुत दिलचस्प था की जहाज में खूंखार शेर और मासूम भीड़ सभी महफूज थे ! जहाज में चढ़ते ही शेरों को बुखार गया और वह पूरे वक्त अपनी जगह पर लेटे ही रहते और इसी वजह से भेड़े महफूज रही सभी खूंखार जानवर किसी ना किसी बीमारी की गिरफ्त में थे चूहे पूरे जहाज में इधर-उधर दौड़ते सारी चीजों को बर्बाद करते वह वाकई परेशानी का सबक थे होटल पैगंबर ने अल्लाह पाक से दुआ की और सब ठीक हो गया !

एक दिन पैगंबर नूह ने कौवे को चलासनी के लिए भेजा लेकिन कौवा वापस नहीं आया और उन्होंने कुछ दिन और इंतजार किया और फिर एक पक्षी को भेजा कुछ दिनों बाद वह विपक्षी मुंह में आंवला की कुछ पत्तियां लेकर आए यह एक इशारा था पैगंबर जान गए की जमीन कहीं आस पास ही है जहाज कुछ दिन और पानी में तैरता रहा फिर आखिर वह एक पहाड़ पर पहुंचा जिसका नाम जुडी था पैगंबर ने कहा बिस्मिल्लाह और जहाज रुक गया आखिरकार सफर खत्म हुआ पैगंबर ने सबसे पहले जानवरों कीड़े मकोड़ों और पक्षियों को जमीन में उतारा वह बाहर गए और उन्होंने दुनिया को फिर से आबाद कर दिया पैगंबर और बाकी मुसलमान बाद में जहाज से धीरे से उतारा है जमीन में रखकर उन्होंने सजदा किया यह इंसानियत की एक नई शुरुआत थी !



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